जब सूर्य से आने वाला प्रकाश सफेद तो परछाई काली क्यों होती है

अक्सर आपने यह देखा होगा की जब हम सूर्य की रोशनी के पास जाते है तो हमारी परछाई को पीछे छोड़ते देते है ! आप ने देखा होगा की एक काली लकीर की छाया भी आपकी ऊंचाई अनुसार लबी चौड़ी होती है

सबसे पहले तो हम आपको यह बताते है की जब हम किसी चीज को कैसे देखते है इस जबाब यह है ! की जब प्रकाश की किरणे किसी चीज पर पड़ती है

कैसे सफर करती है सूर्य की किरण

यदि गिलास खाली है तो उसमें परावर्तन बहुत कम दिखाई देगा ! लेकिन अगर इसमें पानी डाल दिया जाए तो काली छाया बनती हुई नजर आएगी

तो फिर पानी पर छाया क्यों बनती है

अंतरिक्ष में भी यही होता है, सूर्य हमें तभी दिखाई देता है जब हम उसकी ओर देखते हैं और उसकी रोशनी हमारी आंखों तक पहुंचती है !

अंतरिक्ष में स्थिति में दिखाई देती है परछाई 

 यहां एक और बात ध्यान देने वाली है कि कमरे में टॉर्च जल रही है, इसका पता हमें तभी चलता है, जब हम टॉर्च से निकलने वाली रोशनी को सीधे देख पाते हैं !

तभी जब आंखों तक रोशनी पहुंचती है

फिर कमरे में मौजूद वस्तुओं हवा के कणों सहित से टकराने वाली रोशनी हमारी आंखों तक पहुंच सकती है !

यह भी धुंधला होगा और ठोस वस्तु की तरह पूरी तरह काला नहीं होगा ! पानी और कांच दोनों पारदर्शी माध्यम हैं ! जब गिलास खाली था, तो प्रकाश पहले हवा से और फिर कांच से, फिर कांच से और फिर हवा से होकर गुजरा

दीवार तक नहीं जाती है को रौशनी दीवार तक नहीं पहुंचती है वह अपने पीछे एक निर्वात छोड़ जाती है  ! जिसे की हमरी परछाई मानते है परछाई काली इसलिए होती है क्योकि दीवार के उस भाग में कोई रोशनी नहीं होती है