टायर का रंग काला ही क्यों होता है, कोई और रंग क्यों नहीं | GK In Hindi General Knowledge

टायर का रंग काला ही क्यों होता है, कोई और रंग क्यों नहीं | GK In Hindi General Knowledge : आपने जब भी कोई टायर देखा होगा तो वह काले रंग का ही होगा ! आप जब भी अपनी बाइक, कार या किसी अन्य वाहन के लिए टायर खरीदने गए होंगे तो आपको काले रंग के ही टायर मिले होंगे ! गाड़ी चाहे किसी भी रंग की हो, आपको टायर काले रंग के ही नजर आएंगे ! यहां तक कि प्लेन के टायर भी काले रंग के होते हैं ! आपने किसी भी टायर की दुकान पर काले रंग के अलावा किसी भी रंग के टायर नहीं देखे होंगे क्योंकि असल में हर कंपनी के टायरों का रंग काला ही होता है !

टायर का रंग काला ही क्यों होता है, कोई और रंग क्यों नहीं | GK In Hindi General Knowledge

टायर का रंग काला ही क्यों होता है

टायर का रंग काला ही क्यों होता है

बहुत से लोग नहीं जानते होंगे कि करीब 125 साल पहले टायरों का रंग भी सफेद हो गया था ! लेकिन, बाद में इनका रंग काला हो गया यानी ये काले रंग में बनाए जाने लगे ! दरअसल, सफेद टायरों का मूल मटेरियल बहुत मजबूत नहीं होता था, जिसके कारण ऑटोमोबाइल के नजरिए से ये बहुत अच्छे उत्पाद साबित नहीं होते थे !

उन टायरों और पहिये का प्रदर्शन भी काफी प्रभावशाली था ! ऐसे में टायरों को उद्योग में लाया गया और उनकी लाइफ बढ़ाने की जरूरत महसूस हुई, बाद में टायरों के रबर में कार्बन ब्लैक पदार्थ मिलाया जाने लगा ! कार्बन ब्लैक सामग्री के उपयोग से टायर मजबूत हो गए और उनकी उम्र भी बढ़ गई ! लेकिन, इससे टायरों का रंग काला हो गया !

GK In Hindi टायर काले क्यों होते हैं

टायरों का इतिहास काफी पुराना है ! जब रबर की खोज हुई और फिर उससे टायर बनाए जाने लगे तो वे बहुत जल्दी घिस गए ! इसके बाद कुछ और शोध किए गए और पाया गया कि रबर को कार्बन और सल्फर मिलाकर मजबूत किया जा सकता है ! जैसा कि आप जानते हैं कि रबर का प्राकृतिक रंग काला नहीं होता है, लेकिन जब इसमें कार्बन और सल्फर मिलाया जाता है तो इसका रंग काला हो जाता है !

कार्बन क्यों मिलाया जाता है

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चा रबर हल्के पीले रंग का होता है, लेकिन टायर बनाने के लिए इसमें कार्बन मिलाया जाता है ताकि रबर जल्दी खराब न हो ! मजबूती के लिए ही इसमें कार्बन मिलाया जाता है ! कार्बन का रंग काला होता है ! इसलिए टायर भी काले हैं !

रिपोर्ट के मुताबिक, सादे रबर से बना टायर करीब 8 हजार किलोमीटर तक चल सकता है, जबकि कार्बोनाइज्ड रबर से बना टायर 1 लाख किलोमीटर तक चल सकता है ! इसमें कार्बन के साथ-साथ सल्फर भी मिलाया जाता है ! यह स्पष्ट है कि टायर बनाने के लिए उनकी मजबूती के लिए रबर में कार्बन मिलाया जाता है !

General Knowledge अगर टायर अलग रंग का बना हो तो क्या होगा

आपने छोटे बच्चों की साइकिल पर रंग-बिरंगे टायर जरूर देखे होंगे ! चूंकि बच्चों की साइकिलों का खूबसूरत दिखना उनके टायरों की मजबूती से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, इसलिए वे रंग-बिरंगे टायरों पर भी चलती हैं ! की साइकिल पर ज्यादा लोड नहीं होता !

बच्चों की साइकिलें छोटी दूरी के लिए होती हैं और उनके टायर खराब होने में कई दिन लग जाते हैं ! बच्चों की साइकिल में लगे रंगीन टायर भी ठोस होते हैं ! कई टायरों में हवा भरने की जरूरत नहीं होती, इसलिए वे ठीक चलते हैं !

GK In Hindi General Knowledge टायर बनाने में प्रयुक्त रबर का असली रंग सफेद होता है

गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले टायर जिस रबर से बनाए जाते हैं वह बिल्कुल दूध की तरह सफेद होता है ! लेकिन टायरों को टिकाऊपन और मजबूती देने के लिए उन्हें काला रंग दिया जाता है !

लेकिन ये सफ़ेद रबर काला कैसे हो जाता है दरअसल, टायर बनाने में इस्तेमाल होने वाले रबर में कार्बन ब्लैक मिलाया जाता है, जिससे इसका रंग काला हो जाता है !

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