छिपकली की पूँछ कटने के बाद भी क्यों हिलती रहती है | GK In Hindi General Knowledge

छिपकली की पूँछ कटने के बाद भी क्यों हिलती रहती है | GK In Hindi General Knowledge : छिपकलियां आमतौर पर हर घर में पाई जाती हैं ! कई बार हमारी गलतियों का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ता है ! किसी के गलती से उन पर पैर पड़ जाने या किसी चीज के दबाव के कारण उनकी पूँछ कट जाती है ! लेकिन क्या आपने देखा है कि छिपकली की पूंछ कटने के बाद भी हिलती रहती है ! अगर आपने गौर किया होगा तो आपके मन में ये सवाल जरूर आया होगा कि आखिर ऐसा क्यों होता है

छिपकली की पूँछ कटने के बाद भी क्यों हिलती रहती है | GK In Hindi General Knowledge

छिपकली की पूँछ कटने के बाद भी क्यों हिलती रहती है

छिपकली की पूँछ कटने के बाद भी क्यों हिलती रहती है

छिपकली एक सरीसृप एवं रात्रिचर (सूर्यास्त के बाद सक्रिय) प्राणी है ! वे अपने पेट के बल रेंगते हैं ! इनकी जीभ और नाक एक साथ स्थित होती हैं ! इसी कारण से यह अपने शिकार को पकड़ने से पहले अपनी जीभ निकालकर उसे सूंघता है और फिर उसी जीभ से शिकार को पकड़ता है ! इनके पूर्वज डायनासोर थे जो एक विलुप्त प्रजाति है ! रंग बदलने की क्षमता कुछ छिपकलियों में भी पाई जाती है, जिन्हें गिरगिट/बगीचे की छिपकली भी कहा जाता है !

GK In Hindi छिपकली की पूँछ यदि कट जाए तो दोबारा कैसे आ जाती है

छिपकली की पूँछ में पुनर्जनन की एक विशेष क्षमता पाई जाती है ! जिससे उसकी पूँछ कटने के बाद वापस उग आती है ! छिपकली की पूँछ काटने पर खून तो नहीं निकलता लेकिन खून का थक्का बन जाता है और पुनर्जीवित कोशिकाएँ वहाँ आकर उभार बना लेती हैं और फिर पूँछ वापस उसी स्थान पर उग आती है ! इस प्रकार की पुनर्जनन क्षमता कुछ विशेष जीवों जैसे ऑक्टोपस, हाइड्रा, प्लेनेरिया आदि में भी पाई जाती है !

छिपकली की पूँछ कटने के बाद भी क्यों हिलती रहती है नाम एवं विशेष विशेषताएं

  • घरेलू छिपकली का वैज्ञानिक नाम है: लैकर्टिलिया
  • जंगली छिपकली का वैज्ञानिक नाम है: हेमिडैक्टाइलस फ्लेविरिडिस
  • घरों में पाई जाने वाली छिपकलियां जहरीली नहीं होती हैं !
  • हिंदू धर्मग्रंथों में छिपकली को देवी लक्ष्मी का रूप कहा गया है !
  • सबसे खास बात तो यह है कि अगर घर में छिपकली नहीं होगी तो कीड़ों की संख्या लगातार बढ़ती जाएगी !
  • लेखिका श्रीमती शैली शर्मा विदिशा, मध्य प्रदेश में विज्ञान शिक्षिका हैं !

General Knowledge अब सवाल यह है कि क्या ऐसी क्षमता इंसानों में भी पाई जाती है !

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि मनुष्य के नाखून और बालों का पुनर्विकास भी इसी क्षमता के कारण होता है लेकिन ये मृत कोशिकाएं होती हैं ! मानव यकृत में पुनर्जनन की अपार क्षमता पाई जाती है ! किसी भी चोट के बाद घाव का कुछ ही दिनों में ठीक हो जाना भी कोशिकाओं की पुनर्योजी क्षमता का परिणाम है, लेकिन यह क्षमता मानव शरीर के किसी भी बाहरी हिस्से जैसे हाथ, पैर में नहीं पाई जाती है !

छिपकलियां भी अपनी पूँछ गिरा देती हैं

आपको बता दें कि ऐसा सिर्फ दबाव की स्थिति में ही नहीं होता है बल्कि छिपकलियां खुद भी अपनी पूंछ गिरा देती हैं ! अब आप कहेंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है ! दरअसल, छिपकली के पास कोई प्राकृतिक सुरक्षा हथियार नहीं होता, इसलिए जब उसका सामना अपने से बड़े शिकारी से होता है, तो वह अपनी पूंछ गिरा देती है ! वह ऐसा इसलिए करती है ताकि शिकारी का ध्यान भटक जाए और वह समय रहते भागने में सफल हो जाए !

GK In Hindi General Knowledge दबाव महसूस होने पर पूंछ अलग हो जाती है

छिपकली की पूंछ में कमजोरी की एक रेखा होती है जिसे फ्रैक्चर प्लेन कहते हैं, जब भी उसे इस बिंदु पर तनाव या कुछ भी असामान्य महसूस होता है तो वह उस बिंदु से ही अलग हो जाती है जिसे हम रिफ्लेक्स मांसपेशी ऐंठन या मांसपेशी ऐंठन कहते हैं ! कहते हैं ! और उस पूँछ के कंकाल के स्थान पर एक उपास्थि छड़ विकसित हो जाती है जो उसकी रीढ़ की हड्डी से ही बढ़ती है और रंग में कुछ छोटी और हल्के रंग की होती है !

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