स्पेस में तैरते क्यों रहते है एस्ट्रोनॉट गिरये क्यों नहीं, जानें कारण | GK In Hindi General Knowledge

स्पेस में तैरते क्यों रहते है एस्ट्रोनॉट गिरये क्यों नहीं, जानें कारण | GK In Hindi General Knowledge : अगर किसी इंसान को ऐसी जगह पर लंबे समय तक रहने के लिए भेजा जाए जहां गुरुत्वाकर्षण नगण्य है ! जहां इंसान को सारे काम उड़कर ही करने होंगे तो सोचिए धरती पर आने के बाद उसे कैसा अनुभव होगा ! लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को अक्सर इस तरह का अनुभव होता है ! क्योंकि वह कम से कम 1 से 6 महीने तक बिना गुरुत्वाकर्षण के अंतरिक्ष स्टेशन में रहता है !

स्पेस में तैरते क्यों रहते है एस्ट्रोनॉट गिरये क्यों नहीं, जानें कारण | GK In Hindi General Knowledge

स्पेस में तैरते क्यों रहते है एस्ट्रोनॉट गिरये क्यों नहीं

स्पेस में तैरते क्यों रहते है एस्ट्रोनॉट गिरये क्यों नहीं

अपना मिशन पूरा करने के बाद जब वह धरती पर लौटता है तो उसे कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है ! जिसके कारण धरती पर लौटने पर उनका शरीर भी पहले की तरह उनका साथ नहीं देता है !

उन्हें अपने दैनिक कार्य करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है ! इतना ही नहीं, कई महीनों तक बिना गुरुत्वाकर्षण के अंतरिक्ष में रहने के कारण उन्हें चलने में भी काफी दिक्कत होती है !

अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में कई दिन बिताने के बाद जब धरती पर लौटते हैं तो उन्हें चलने में काफी परेशानी होती है ! वैज्ञानिकों ने इस पर व्यापक अध्ययन किया है और अभी भी कर रहे हैं !

इन अध्ययनों में उन्होंने कुछ खास कारणों का पता लगाया है जिनकी वजह से अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी पर लौटने के बाद चलने में काफी दिक्कत होती है !

GK In Hindi स्पेस में तैरते क्यों रहते है एस्ट्रोनॉट गिरये क्यों नहीं

दरअसल, मानव शरीर अंतरिक्ष के वातावरण को झेलने में पूरी तरह सक्षम नहीं है ! वहां गुरुत्वाकर्षण की कमी से उनके स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है !

इसलिए बहुत कम लोग जानते हैं कि लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने के कारण अंतरिक्ष यात्री के शरीर पर सबसे ज्यादा असर उसकी हड्डियों और मांसपेशियों पर पड़ता है !

यही कारण है कि जब वह अपनी अंतरिक्ष यात्रा पूरी करके पृथ्वी पर लौटते हैं तो उन्हें स्ट्रेचर या कुर्सी पर ले जाया जाता है ! वे चलते नहीं दिख रहे हैं !

General Knowledge पृथ्वी से 89 प्रतिशत कम गुरुत्वाकर्षण

अंतरिक्ष में सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण है ! वहां पृथ्वी की तुलना में 89 फीसदी कम गुरुत्वाकर्षण महसूस होता है ! इसी वजह से वह हमेशा हवा में तैरता नजर आता है !

यही स्थिति अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में भी होती है और यात्री हमेशा तैरते रहते हैं ! गुरुत्वाकर्षण के अभाव के कारण उनकी मांसपेशियों और हड्डियों को अधिक काम करने की आवश्यकता नहीं होती है !

GK In Hindi General Knowledge अंतरिक्ष यात्रियों को मांसपेशियों और हड्डियों में दिक्कत का सामना करना पड़ता है !

सेहत को लेकर हमेशा यही माना जाता है कि जब तक हम कड़ी मेहनत नहीं करेंगे, हमारा शरीर फिट नहीं रहेगा ! अंतरिक्ष में कम गुरुत्वाकर्षण और शरीर से ज्यादा काम न लेने के कारण अंतरिक्ष यात्रियों को मांसपेशियों और हड्डियों में काफी दिक्कत होने लगती है ! उनके कूल्हों, पैरों और रीढ़ की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं !

कैल्शियम की कमी उन्हें और कमजोर बना देती है और धरती पर आने पर उनके घायल होने की संभावना भी बढ़ जाती है ! हड्डियों के अलावा पैरों और शरीर के बाकी हिस्सों की मांसपेशियां भी कमजोर हो जाती हैं, जिससे धरती पर लौटने के बाद चलने में काफी दिक्कत होती है !

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